📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / SpotboyE
मनोरंजन
'दुपहिया' की शिवानी राघुवंशी: बॉलीवुड को हास्य नायिकाओं की लिखाई नहीं आती
✍️ ThePrint
🗓 08 नव. 2026, 02:40 PM
👁 2
'दुपहिया' में अपनी भूमिका के लिए जानी जाने वाली अभिनेत्री शिवानी राघुवंशी ने बॉलीवुड पर हमला बोला है। उनका कहना है कि फिल्म इंडस्ट्री को महिलाओं के लिए हास्य भूमिकाओं को लिखने का तरीका नहीं आता।
'दुपहिया' फिल्म में अपनी अभिनय के लिए चर्चा में आई शिवानी राघुवंशी ने बॉलीवुड की हास्य लिखाई पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री को महिलाओं के लिए मजेदार भूमिकाओं को लिखने का तरीका नहीं आता, जो कि स्क्रिप्ट राइटिंग में एक बड़ा खालीपन दर्शाता है।
उनकी टिप्पणी से पता चलता है कि महिला कॉमेडियनों को अक्सर नजरअंदाज किया जाता है या उन्हें पारंपरिक भूमिकाओं में सीमित रखा जाता है, बजाय इसके कि उन्हें न्यूअन्स्ड और वास्तविक रूप से मजेदार भूमिकाएं दी जाएं। शिवानी के इस विचार से हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में पुरुषों के केंद्रित हास्य की प्रबलता और महिलाओं के हास्य की कमी या खराब निष्पादन की समस्या सामने आती है।
एक ऐसी अभिनेत्री, जिन्होंने सफलतापूर्वक कॉमेडी भूमिकाओं को निभाया है, शिवानी राघुवंशी की यह आलोचना बेहतर प्रतिनिधित्व और अधिक प्रामाणिक कहानी कहने की एक अपील के रूप में देखी जा रही है। उनकी टिप्पणी से फिल्म निर्माताओं और दर्शकों के बीच भारतीय सिनेमा में हास्य के विकास के बारे में चर्चाओं को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
यह बयान लेखकों को पारंपरिक लिंग स्टीरियोटाइप से आगे बढ़ने और महिला पात्रों के लिए उपलब्ध हास्य के पूरे स्पेक्ट्रम को खोजने की आवश्यकता को रेखांकित करता है। यह चर्चा इंडस्ट्री में विविध और समावेशी नैरटिव्स की बढ़ती मांगों के साथ तालमेल रखती है।
उनकी टिप्पणी से पता चलता है कि महिला कॉमेडियनों को अक्सर नजरअंदाज किया जाता है या उन्हें पारंपरिक भूमिकाओं में सीमित रखा जाता है, बजाय इसके कि उन्हें न्यूअन्स्ड और वास्तविक रूप से मजेदार भूमिकाएं दी जाएं। शिवानी के इस विचार से हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में पुरुषों के केंद्रित हास्य की प्रबलता और महिलाओं के हास्य की कमी या खराब निष्पादन की समस्या सामने आती है।
एक ऐसी अभिनेत्री, जिन्होंने सफलतापूर्वक कॉमेडी भूमिकाओं को निभाया है, शिवानी राघुवंशी की यह आलोचना बेहतर प्रतिनिधित्व और अधिक प्रामाणिक कहानी कहने की एक अपील के रूप में देखी जा रही है। उनकी टिप्पणी से फिल्म निर्माताओं और दर्शकों के बीच भारतीय सिनेमा में हास्य के विकास के बारे में चर्चाओं को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
यह बयान लेखकों को पारंपरिक लिंग स्टीरियोटाइप से आगे बढ़ने और महिला पात्रों के लिए उपलब्ध हास्य के पूरे स्पेक्ट्रम को खोजने की आवश्यकता को रेखांकित करता है। यह चर्चा इंडस्ट्री में विविध और समावेशी नैरटिव्स की बढ़ती मांगों के साथ तालमेल रखती है।