📷 चित्र स्रोत: Times of India (via NewsData)
टेक्नोलॉजी
रिपोर्ट: एपल की गुप्त 'ग्रेलिस्ट' पर मोदी, राहुल और ट्रंप का नाम
✍️ Times of India
🗓 06 नव. 2026, 11:49 PM
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हाल की एक रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राहुल गांधी और डोनाल्ड ट्रंप एपल की संवेदनशील मैसेजिंग के लिए आंतरिक 'ग्रेलिस्ट' में शामिल हैं।
एक नई रिपोर्ट सामने आई है जिसमें दावा किया गया है कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विपक्षी नेता राहुल गांधी और पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सहित कई प्रमुख वैश्विक राजनीतिक व्यक्ति एपल की आंतरिक 'ग्रेलिस्ट' का हिस्सा हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, एपल इस सूची का उपयोग उन खातों को चिह्नित करने के लिए करता है जो संवेदनशील संचार के संदर्भ में बढ़ाई गई निगरानी या विशिष्ट सुरक्षा प्रोटोकॉल के अधीन हो सकते हैं। प्रभावशाली राजनीतिक नेताओं के शामिल होने से यह पता चलता है कि कंपनी संवेदनशील डेटा और सुरक्षा जोखिमों को कैसे प्रबंधित करती है।
'ग्रेलिस्ट' की रिपोर्ट के अनुसार, यह एक ऐसा तंत्र है जो इन खातों से गतिविधियों के विशिष्ट पैटर्न की पहचान करने पर सुरक्षा टीमों को अलर्ट देने या कुछ विशेष सुविधाओं को सीमित करने के लिए काम करता है। हालांकि, एपल ने शामिल नामों पर आधिकारिक तौर पर टिप्पणी नहीं की है, लेकिन इस खुलासे से डिजिटल गोपनीयता और राजनीतिक संचार के प्रबंधन में कॉर्पोरेट जवाबदेही पर चर्चा शुरू हो गई है।
यह घटना तकनीकी दिग्गजों और राजनीतिक संस्थाओं के बीच जटिल संबंधों को उजागर करती है, जिससे उपयोगकर्ता गोपनीयता और राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं के बीच संतुलन बनाने के तरीकों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, एपल इस सूची का उपयोग उन खातों को चिह्नित करने के लिए करता है जो संवेदनशील संचार के संदर्भ में बढ़ाई गई निगरानी या विशिष्ट सुरक्षा प्रोटोकॉल के अधीन हो सकते हैं। प्रभावशाली राजनीतिक नेताओं के शामिल होने से यह पता चलता है कि कंपनी संवेदनशील डेटा और सुरक्षा जोखिमों को कैसे प्रबंधित करती है।
'ग्रेलिस्ट' की रिपोर्ट के अनुसार, यह एक ऐसा तंत्र है जो इन खातों से गतिविधियों के विशिष्ट पैटर्न की पहचान करने पर सुरक्षा टीमों को अलर्ट देने या कुछ विशेष सुविधाओं को सीमित करने के लिए काम करता है। हालांकि, एपल ने शामिल नामों पर आधिकारिक तौर पर टिप्पणी नहीं की है, लेकिन इस खुलासे से डिजिटल गोपनीयता और राजनीतिक संचार के प्रबंधन में कॉर्पोरेट जवाबदेही पर चर्चा शुरू हो गई है।
यह घटना तकनीकी दिग्गजों और राजनीतिक संस्थाओं के बीच जटिल संबंधों को उजागर करती है, जिससे उपयोगकर्ता गोपनीयता और राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं के बीच संतुलन बनाने के तरीकों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।