📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Alpsdake
स्वास्थ्य
दिवाली पर पटाखों से चोटों के लिए भोपाल के अस्पताल अलर्ट, जेपी में बर्न यूनिट तैयार
✍️ Amar Ujala · Bhopal
🗓 07 नव. 2026, 06:36 PM
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दिवाली पर पटाखों से होने वाली संभावित चोटों के इलाज के लिए भोपाल के अस्पतालों को अलर्ट किया गया है, जहां जेपी अस्पताल ने विशेष बर्न यूनिट तैयार की है।
भोपाल में स्वास्थ्य अधिकारियों ने आगामी दिवाली पर्व के दौरान पटाखों से होने वाली चोटों के मामलों को संभालने के लिए स्थानीय अस्पतालों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश जारी किए हैं। इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि चिकित्सा सुविधाएं तुरंत उपचार की आवश्यकता वाले मरीजों के बढ़ते दबाव का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार रहें।
पटाखों से होने वाले दुर्घटनाओं से जुड़े विशेष जोखिमों को ध्यान में रखते हुए, भोपाल के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज (जेपी) अस्पताल में एक विशेष बर्न यूनिट तैयार की जा रही है। इस यूनिट में गंभीर झुलस (बर्न) से पीड़ित मरीजों को केंद्रित और विशेषज्ञ देखभाल प्रदान करने के लिए आठ समर्पित बिस्तर रखे जाएंगे।
अस्पतालों को अलर्ट पर रखने का निर्णय त्योहारों के दौरान अवैध या गलत तरीके से प्रयोग किए जाने वाले पटाखों से जुड़ी दुर्घटनाओं के बार-बार होने वाले पैटर्न को दर्शाता है। चिकित्सा स्टाफ को आपातकालीन मामलों के त्वरित प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार रहने की सलाह दी गई है।
उत्सवों के दौरान सुरक्षा प्रोटोकॉल की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करते हुए, यह प्रोएक्टिव कदम शहर में आग से जुड़ी चोटों के जोखिम में आम तौर पर होने वाली वृद्धि को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।
पटाखों से होने वाले दुर्घटनाओं से जुड़े विशेष जोखिमों को ध्यान में रखते हुए, भोपाल के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज (जेपी) अस्पताल में एक विशेष बर्न यूनिट तैयार की जा रही है। इस यूनिट में गंभीर झुलस (बर्न) से पीड़ित मरीजों को केंद्रित और विशेषज्ञ देखभाल प्रदान करने के लिए आठ समर्पित बिस्तर रखे जाएंगे।
अस्पतालों को अलर्ट पर रखने का निर्णय त्योहारों के दौरान अवैध या गलत तरीके से प्रयोग किए जाने वाले पटाखों से जुड़ी दुर्घटनाओं के बार-बार होने वाले पैटर्न को दर्शाता है। चिकित्सा स्टाफ को आपातकालीन मामलों के त्वरित प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार रहने की सलाह दी गई है।
उत्सवों के दौरान सुरक्षा प्रोटोकॉल की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करते हुए, यह प्रोएक्टिव कदम शहर में आग से जुड़ी चोटों के जोखिम में आम तौर पर होने वाली वृद्धि को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।