📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Cpl Lee Goddard
रक्षा
रॉयल एयरफोर्स में सिख पायलटों ने जेट विमानों के लिए दाढ़ी कटवाने की मजबूरी को चुनौती दी
✍️ Amar Ujala · Amritsar
🗓 05 नव. 2026, 12:36 PM
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ब्रिटेन की रॉयल एयरफोर्स में तैनात सिख पायलटों ने जेट विमानों के संचालन के दौरान टюрबन और दाढ़ी हटाने के अनिवार्य नियम के विरोध में आवाज उठाई है।
ब्रिटेन की रॉयल एयरफोर्स (RAF) में सेवा निभा रहे सिख पायलटों ने जेट विमानों के संचालन के दौरान टюрबन और दाढ़ी हटाने के अनिवार्य नियम के खिलाफ अपनी नाराजगी जताई है। पायलटों ने इस शर्त से छूट दिलाने की मांग उठाई है ताकि वे उड़ान के दौरान भी अपने धार्मिक पहचान को बनाए रख सकें।
यह विवाद RAF के सख्त संचालन प्रोटोकॉल के चारों ओर केंद्रित है, जिसके तहत सिख एविएटरों को कुछ विशेष जेट मॉडल उड़ाने के लिए अपनी दाढ़ी काटनी और सिर का ढकना (टюрबन) उतारना पड़ता है। इस नियम ने सैन्य बलों में सिख समुदाय में गहरी असंतोष पैदा किया है, जहां यह माना जा रहा है कि यह नियम उनके धार्मिक मानदंडों और व्यक्तिगत गरिमा के विपरीत है।
छूट की यह मांग यूनाइटेड किंगडम में धार्मिक स्वतंत्रता और सैन्य संचालन मानकों के बीच चलते संवाद को उजागर करती है। हालांकि RAF कोकपिट संचालन के लिए सख्त सुरक्षा मार्गदर्शिकाओं का पालन करता है, लेकिन प्रभावित पायलट इन नीतियों की समीक्षा के लिए आवाज उठा रहे हैं ताकि सुरक्षा या संचालन दक्षता पर कोई प्रभाव पड़े बिना उनके धार्मिक अधिकारों का सम्मान किया जा सके।
यह घटनाक्रम विश्व भर के सैन्य बलों में धार्मिक अल्पसंख्यकों द्वारा सामने आने वाली बड़ी चुनौतियों को दर्शाता है, जहां सांस्कृतिक और धार्मिक प्रतिबद्धताओं के साथ सख्त सैन्य प्रोटोकॉल को संतुलित करना एक जटिल मुद्दा बना हुआ है।
यह विवाद RAF के सख्त संचालन प्रोटोकॉल के चारों ओर केंद्रित है, जिसके तहत सिख एविएटरों को कुछ विशेष जेट मॉडल उड़ाने के लिए अपनी दाढ़ी काटनी और सिर का ढकना (टюрबन) उतारना पड़ता है। इस नियम ने सैन्य बलों में सिख समुदाय में गहरी असंतोष पैदा किया है, जहां यह माना जा रहा है कि यह नियम उनके धार्मिक मानदंडों और व्यक्तिगत गरिमा के विपरीत है।
छूट की यह मांग यूनाइटेड किंगडम में धार्मिक स्वतंत्रता और सैन्य संचालन मानकों के बीच चलते संवाद को उजागर करती है। हालांकि RAF कोकपिट संचालन के लिए सख्त सुरक्षा मार्गदर्शिकाओं का पालन करता है, लेकिन प्रभावित पायलट इन नीतियों की समीक्षा के लिए आवाज उठा रहे हैं ताकि सुरक्षा या संचालन दक्षता पर कोई प्रभाव पड़े बिना उनके धार्मिक अधिकारों का सम्मान किया जा सके।
यह घटनाक्रम विश्व भर के सैन्य बलों में धार्मिक अल्पसंख्यकों द्वारा सामने आने वाली बड़ी चुनौतियों को दर्शाता है, जहां सांस्कृतिक और धार्मिक प्रतिबद्धताओं के साथ सख्त सैन्य प्रोटोकॉल को संतुलित करना एक जटिल मुद्दा बना हुआ है।