📷 चित्र स्रोत: TOI India (via NewsData)
राजनीति
शशि थारूर ने दिल्ली सरकार की धुंध पर की तीखी टिप्पणी, केरल की साफ़ हवा की प्रशंसा
✍️ TOI India
🗓 07 नव. 2026, 12:43 PM
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केन्द्रीय मंत्री शशि थारूर ने दिल्ली सरकार की बढ़ती धुंध पर निशाना साधते हुए कहा कि केरल की साफ़ हवा में सांस लेना राहत देता है।
केन्द्रीय मंत्री शशि थारूर ने हालिया सार्वजनिक अवसर पर दिल्ली की बिगड़ती वायु गुणवत्ता और केरल की तुलनात्मक रूप से शुद्ध हवा के बीच स्पष्ट अंतर को उजागर किया। उन्होंने चेतावनी दी कि राजधानी में लगातार धुंध स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है और इस पर नियंत्रण के लिए दिल्ली सरकार को अधिक ठोस कदम उठाने का आह्वान किया।
थारूर ने कहा कि जब भी वह केरल आते हैं तो हवा में ताज़गी और राहत महसूस करते हैं, जबकि दिल्ली में अक्सर घनी धुंध सांस लेने में कठिनाई पैदा करती है। उन्होंने केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि वह दिल्ली को अतिरिक्त संसाधन और कड़े प्रदूषण नियंत्रण उपाय प्रदान करे।
इन टिप्पणियों का समय ऐसा है जब दिल्ली में पार्टिकुलेट मैटर स्तर लगातार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच रहा है, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य सलाह और स्कूल बंदी जैसी कदम उठाए गए हैं। थारूर ने केरल की पर्यावरणीय नीतियों की प्रशंसा की, पर किसी विशिष्ट योजना का उल्लेख नहीं किया, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।
दिल्ली के अधिकारियों ने अभी तक थारूर की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया नहीं दी है, पर यह आलोचना राज्य सरकार पर बढ़ते राजनीतिक दबाव को और तेज़ करती है, जिससे शीतकालीन मौसम से पहले वायु‑गुणवत्ता आपातकाल को सुलझाने की मांग बढ़ रही है।
थारूर ने कहा कि जब भी वह केरल आते हैं तो हवा में ताज़गी और राहत महसूस करते हैं, जबकि दिल्ली में अक्सर घनी धुंध सांस लेने में कठिनाई पैदा करती है। उन्होंने केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि वह दिल्ली को अतिरिक्त संसाधन और कड़े प्रदूषण नियंत्रण उपाय प्रदान करे।
इन टिप्पणियों का समय ऐसा है जब दिल्ली में पार्टिकुलेट मैटर स्तर लगातार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच रहा है, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य सलाह और स्कूल बंदी जैसी कदम उठाए गए हैं। थारूर ने केरल की पर्यावरणीय नीतियों की प्रशंसा की, पर किसी विशिष्ट योजना का उल्लेख नहीं किया, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।
दिल्ली के अधिकारियों ने अभी तक थारूर की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया नहीं दी है, पर यह आलोचना राज्य सरकार पर बढ़ते राजनीतिक दबाव को और तेज़ करती है, जिससे शीतकालीन मौसम से पहले वायु‑गुणवत्ता आपातकाल को सुलझाने की मांग बढ़ रही है।