📷 चित्र स्रोत: The Hindu (via NewsData)
राजनीति
कलाडी में एसएफआई कार्यकर्ताओं ने बैनर प्रदर्शन किया, 13 अगस्त की घटनाओं के लिए माफ़ी से इनकार
✍️ The Hindu
🗓 05 नव. 2026, 09:50 PM
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कलाडी में निलंबित एसएफआई कार्यकर्ताओं ने बैनर प्रदर्शन किया और 13 अगस्त को हुए कैंपस विवादों के लिए माफ़ी मांगने से इनकार कर दिया, जिससे 'शून्य सहनशीलता' नीति पर उनकी रुख स्पष्ट हुआ।
केरल के कलाडी में निलंबित छात्र संघ (एसएफआई) के कुछ कार्यकर्ताओं ने हाल के कैंपस अशांति पर प्रशासन के रुख के विरोध में बैनर प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन का उद्देश्य 13 अगस्त को कैंपस में हुए हिंसक विवादों के लिए माफ़ी मांगने से इनकार करने की अपनी स्थिति स्पष्ट करना था।
यह प्रदर्शन रोजी एम. जॉन के बयान के बाद आया, जिन्होंने शैक्षणिक संस्थानों में हिंसा के खिलाफ 'शून्य सहनशीलता' नीति पर जोर दिया था। निलंबित कार्यकर्ताओं ने बैनर प्रदर्शन के जरिए घोषणा की कि वे 13 अगस्त के संघर्षों के दौरान अपने कार्यों के लिए माफ़ी नहीं मांगेंगे, और प्रशासन के उपायों से असहमति जताते हुए प्रदर्शन करने का अपना अधिकार बरकरार रखेंगे।
यह घटना केरल में छात्र संघों और कॉलेज प्रशासनों के बीच कैंपस विवादों के संभालने के तरीके को लेकर चल रही तनाव को उजागर करती है। एसएफआई कार्यकर्ताओं की माफ़ी से इनकार की वजह से स्थिति और ध्रुवीकृत हो गई है, जबकि प्रशासन शैक्षणिक संस्थानों में शांति और व्यवस्था बनाए रखने के लिए अपनी सख्त नीति बनाए रखे हुए है।
प्रदर्शनकारियों की माफ़ी से इनकार के अलावा उनके किसी अन्य विशिष्ट मांग के बारे में और विवरण उपलब्ध नहीं है, लेकिन यह घटना क्षेत्र में छात्र राजनीतिक संगठनों और संस्थागत अधिकारियों के बीच जारी घर्षण को रेखांकित करती है।
यह प्रदर्शन रोजी एम. जॉन के बयान के बाद आया, जिन्होंने शैक्षणिक संस्थानों में हिंसा के खिलाफ 'शून्य सहनशीलता' नीति पर जोर दिया था। निलंबित कार्यकर्ताओं ने बैनर प्रदर्शन के जरिए घोषणा की कि वे 13 अगस्त के संघर्षों के दौरान अपने कार्यों के लिए माफ़ी नहीं मांगेंगे, और प्रशासन के उपायों से असहमति जताते हुए प्रदर्शन करने का अपना अधिकार बरकरार रखेंगे।
यह घटना केरल में छात्र संघों और कॉलेज प्रशासनों के बीच कैंपस विवादों के संभालने के तरीके को लेकर चल रही तनाव को उजागर करती है। एसएफआई कार्यकर्ताओं की माफ़ी से इनकार की वजह से स्थिति और ध्रुवीकृत हो गई है, जबकि प्रशासन शैक्षणिक संस्थानों में शांति और व्यवस्था बनाए रखने के लिए अपनी सख्त नीति बनाए रखे हुए है।
प्रदर्शनकारियों की माफ़ी से इनकार के अलावा उनके किसी अन्य विशिष्ट मांग के बारे में और विवरण उपलब्ध नहीं है, लेकिन यह घटना क्षेत्र में छात्र राजनीतिक संगठनों और संस्थागत अधिकारियों के बीच जारी घर्षण को रेखांकित करती है।