📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / 108manoj1
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सीहोर: महंगाई के चलते मिट्टी के दीपक कारीगरों की मुश्किलें, 25 दीपक सिर्फ 20 रुपये में बेचने को मजबूर
✍️ Amar Ujala · Madhya Pradesh
🗓 07 नव. 2026, 03:36 PM
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मध्य प्रदेश के सीहोर में मिट्टी के दीपक बनाने वाले कारीगरों को कच्चे माल की बढ़ती कीमतों की वजह से नुकसान उठाना पड़ रहा है। वे 25 दीपक सिर्फ 20 रुपये में बेचने को मजबूर हैं और प्रति दीपक दो रुपये की कीमत के साथ सरकारी सहायता की मांग कर रहे हैं।
मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में दीपावली के लिए मिट्टी के दीपक बनाने वाले कारीगरों की हालत बेहाल है। कच्चे माल यानी मिट्टी, कंडे और चाक की कीमतों में हुए भारी इजाफे की वजह से ये कारीगर अपने खर्च भी नहीं निकाल पा रहे हैं।
महंगाई के चलते कारीगरों को 25 दीपक का बंडल सिर्फ 20 रुपये में बेचना पड़ रहा है। इस मूल्य पर उन्हें न तो मुनाफा हो पा रहा है और न ही उनके उत्पादन के खर्च पूरी तरह से कवर हो पा रहे हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति गंभीर रूप से प्रभावित हुई है।
इस समस्या के समाधान के लिए कारीगरों ने प्रति दीपक दो रुपये की नई कीमत निर्धारित करने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि बढ़ती लागत के हिसाब से वर्तमान कीमत उनके लिए बर्दाश्त करने योग्य नहीं है।
साथ ही, कारीगरों ने सरकार से भी आर्थिक सहायता की गुहार लगाई है। वे चाहते हैं कि सरकार उनकी मदद करे ताकि वे इस आर्थिक संकट से बाहर निकल सकें और पारंपरिक कला को आगे बढ़ाते हुए दीपावली पर लोगों के घरों को रोशन करते रह सकें।
महंगाई के चलते कारीगरों को 25 दीपक का बंडल सिर्फ 20 रुपये में बेचना पड़ रहा है। इस मूल्य पर उन्हें न तो मुनाफा हो पा रहा है और न ही उनके उत्पादन के खर्च पूरी तरह से कवर हो पा रहे हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति गंभीर रूप से प्रभावित हुई है।
इस समस्या के समाधान के लिए कारीगरों ने प्रति दीपक दो रुपये की नई कीमत निर्धारित करने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि बढ़ती लागत के हिसाब से वर्तमान कीमत उनके लिए बर्दाश्त करने योग्य नहीं है।
साथ ही, कारीगरों ने सरकार से भी आर्थिक सहायता की गुहार लगाई है। वे चाहते हैं कि सरकार उनकी मदद करे ताकि वे इस आर्थिक संकट से बाहर निकल सकें और पारंपरिक कला को आगे बढ़ाते हुए दीपावली पर लोगों के घरों को रोशन करते रह सकें।