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08 नव. 2026•
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एनएलआईयू शोध: सख्त कानून के बावजूद 300 में से 154 दोषियों ने नाबालिगों को बनाया निशाना
📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Yashsvijay
अपराध

एनएलआईयू शोध: सख्त कानून के बावजूद 300 में से 154 दोषियों ने नाबालिगों को बनाया निशाना

✍️ Amar Ujala · Madhya Pradesh 🗓 31 अक्टू. 2026, 05:37 PM 👁 3
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नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी के छह साल के शोध में सामने आया कि मध्य प्रदेश के 300 दोषियों में से 154 ने नाबालिगों को निशाना बनाया, जिससे सख्त सजा के बावजूद अपराध की रोकथाम की चुनौती स्पष्ट हुई।

नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी (एनएलआईयू) द्वारा किए गए छह साल के विस्तृत शोध ने भारत में यौन हिंसा की समस्या पर प्रकाश डाला है। इस अध्ययन में अपराधियों के मानसिक दृष्टिकोण पर विशेष ध्यान दिया गया है, जिससे यह स्पष्ट हुआ है कि फांसी और उम्रकैद जैसी सख्त कानूनी व्यवस्थाओं के बावजूद, दुष्कर्म के पीछे के मनोवैज्ञानिक कारकों को प्रभावी रूप से नियंत्रित नहीं किया जा सका है।

इस शोध के तहत मध्य प्रदेश की जेलों में बंद 300 दोषियों से गहन साक्षात्कार किए गए। इन बातचीतों के दौरान सामने आया कि यौन अपराधों के शिकारों के बारे में एक चिंताजनक रुझान है। 300 दोषियों में से 154 ने नाबालिगों को निशाना बनाया था, जो नमूने के आधे से अधिक हिस्से को दर्शाता है।

ये आंकड़े संकेत देते हैं कि सजा की कठोरता, विशेष रूप से उन अपराधियों के लिए, जो कमजोर बच्चों को निशाना बनाते हैं, एक पर्याप्त रोकथाम कारक नहीं है। इस अध्ययन ने यह तर्क प्रस्तुत किया है कि दंडात्मक उपायों के अलावा मनोवैज्ञानिक हस्तक्षेप और सख्त कार्रवाई के तंत्रों की आवश्यकता है।

यह रिपोर्ट नीति निर्माताओं और कानूनी विशेषज्ञों के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ प्रदान करती है, जो यह जोर देकर कहती है कि केवल कानूनी सुधारों से दुष्कर्म की घटनाओं को रोकना पर्याप्त नहीं है। इसमें ऐसे अपराधों के मूल कारणों को समझने और प्रभावी रोकथाम रणनीतियों को विकसित करने की अत्यंत आवश्यकता पर बल दिया गया है।
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