📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ignasi
अपराध
मुजफ्फरपुर पीएनजी गैस पाइपलाइन हादसे में 11 अधिकारियों के खिलाफ दायर किया गया आरोप
✍️ Amar Ujala · Muzaffarpur
🗓 05 नव. 2026, 08:36 PM
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मुजफ्फरपुर के गोबरसही‑डुमरी रोड पर पीएनजी गैस पाइपलाइन विस्फोट के बाद अधिवक्ता सुशील कुमार सिंह ने 11 अधिकारियों के खिलाफ लापरवाही का आरोप दर्ज किया।
मुजफ्फरपुर के गोबरसही‑डुमरी रोड पर हुई पीएनजी गैस पाइपलाइन विस्फोट की जाँच अब अदालत तक पहुँच गई है। अधिवक्ता सुशील कुमार सिंह ने जिला कोर्ट में एक औपचारिक परिवाद दायर किया, जिसमें उन्होंने इस दुर्घटना के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को आपराधिक दायित्व के तहत लाने की मांग की है।
परिवाद में इण्डियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (IOC), राज्य पथ निर्माण विभाग और नाला निर्माण एजेंसी के वरिष्ठ अधिकारियों सहित कुल ग्यारह व्यक्तियों का नाम शामिल है। दायरकर्ता के अनुसार, इन अधिकारियों ने सुरक्षा मानकों की उपेक्षा की, जिससे पाइपलाइन फट कर नुकसान हुआ।
लापरवाही के आधार पर दायर किया गया यह परिवाद आरोपी को भारतीय दंड संहिता के तहत दंडित करने और पीड़ितों को मुआवजा दिलाने की दिशा में है। अब अदालत प्रस्तुत साक्ष्यों की जांच कर यह तय करेगी कि आरोप पत्र दर्ज किया जाए या नहीं।
यह मामला बिहार में बुनियादी ढाँचे की सुरक्षा को लेकर बढ़ती सार्वजनिक जाँच को उजागर करता है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहाँ गैस पाइपलाइन, सड़क और जल निकासी कार्य आपस में जुड़े होते हैं। अधिकारियों से समान घटनाओं को रोकने हेतु मौजूदा प्रोटोकॉल की समीक्षा करने का आग्रह किया गया है।
परिवाद में इण्डियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (IOC), राज्य पथ निर्माण विभाग और नाला निर्माण एजेंसी के वरिष्ठ अधिकारियों सहित कुल ग्यारह व्यक्तियों का नाम शामिल है। दायरकर्ता के अनुसार, इन अधिकारियों ने सुरक्षा मानकों की उपेक्षा की, जिससे पाइपलाइन फट कर नुकसान हुआ।
लापरवाही के आधार पर दायर किया गया यह परिवाद आरोपी को भारतीय दंड संहिता के तहत दंडित करने और पीड़ितों को मुआवजा दिलाने की दिशा में है। अब अदालत प्रस्तुत साक्ष्यों की जांच कर यह तय करेगी कि आरोप पत्र दर्ज किया जाए या नहीं।
यह मामला बिहार में बुनियादी ढाँचे की सुरक्षा को लेकर बढ़ती सार्वजनिक जाँच को उजागर करता है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहाँ गैस पाइपलाइन, सड़क और जल निकासी कार्य आपस में जुड़े होते हैं। अधिकारियों से समान घटनाओं को रोकने हेतु मौजूदा प्रोटोकॉल की समीक्षा करने का आग्रह किया गया है।