📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Vice President's Secretariat
शिक्षा
जम्मू-कश्मीर ने निजी विश्वविद्यालयों के लिए नए नियम जारी, सीएम उमर का कहना है शिक्षा में सुधार
✍️ Daily Excelsior
🗓 07 नव. 2026, 08:40 PM
👁 3
जम्मू-कश्मीर ने निजी विश्वविद्यालयों के लिए नियम जारी किए, मुख्यमंत्री मोहम्मद अब्दुल्ला उमर ने कहा यह कदम उच्च शिक्षा को सुदृढ़ करेगा।
जम्मू-कश्मीर सरकार ने निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना, मान्यता और संचालन को नियंत्रित करने के लिए विस्तृत नियमावली जारी की है। इस अधिसूचना में संस्थानों को मान्यता प्राप्त करने के लिए आवश्यक प्रक्रियात्मक शर्तें, जैसे कि संकाय की योग्यता, बुनियादी ढांचा और वित्तीय स्थिरता के मानक निर्धारित किए गए हैं।
मुख्यमंत्री मोहम्मद अब्दुल्ला उमर ने कहा कि यह नियामक ढांचा उच्च शिक्षा तक पहुंच बढ़ाने और शैक्षणिक मानकों को ऊँचा उठाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। उन्होंने बताया कि निजी विश्वविद्यालय सार्वजनिक संस्थानों के साथ मिलकर छात्रों को अधिक विकल्प प्रदान करेंगे और अनुसंधान व नवाचार को प्रोत्साहित करेंगे।
नए नियमों के तहत निजी विश्वविद्यालयों को नई पाठ्यक्रम शुरू करने से पहले राज्य उच्च शिक्षा प्राधिकरण से अनुमति लेनी होगी और समय‑समय पर ऑडिट कराना अनिवार्य होगा। सरकार का लक्ष्य घटिया संस्थानों को रोकना और छात्रों के हितों की रक्षा करना है।
प्रशासन ने कहा कि नियमों के कार्यान्वयन की करीबी निगरानी की जाएगी और आगामी महीनों में उनके प्रभाव का मूल्यांकन कर आगे की सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे, जिससे जम्मू‑कश्मीर में उच्च शिक्षा प्रणाली को सुदृढ़ किया जा सके।
मुख्यमंत्री मोहम्मद अब्दुल्ला उमर ने कहा कि यह नियामक ढांचा उच्च शिक्षा तक पहुंच बढ़ाने और शैक्षणिक मानकों को ऊँचा उठाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। उन्होंने बताया कि निजी विश्वविद्यालय सार्वजनिक संस्थानों के साथ मिलकर छात्रों को अधिक विकल्प प्रदान करेंगे और अनुसंधान व नवाचार को प्रोत्साहित करेंगे।
नए नियमों के तहत निजी विश्वविद्यालयों को नई पाठ्यक्रम शुरू करने से पहले राज्य उच्च शिक्षा प्राधिकरण से अनुमति लेनी होगी और समय‑समय पर ऑडिट कराना अनिवार्य होगा। सरकार का लक्ष्य घटिया संस्थानों को रोकना और छात्रों के हितों की रक्षा करना है।
प्रशासन ने कहा कि नियमों के कार्यान्वयन की करीबी निगरानी की जाएगी और आगामी महीनों में उनके प्रभाव का मूल्यांकन कर आगे की सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे, जिससे जम्मू‑कश्मीर में उच्च शिक्षा प्रणाली को सुदृढ़ किया जा सके।