📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Flashthomsom
राजनीति
देवघर चारा घोटाले में लालू यादव की अपील पर झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई
✍️ Amar Ujala · Patna
🗓 04 नव. 2026, 10:37 PM
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झारखंड हाईकोर्ट ने देवघर कोषागार चारा घोटाले में पूर्व बिहार मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की अपील पर सुनवाई की। पूर्व उपायुक्तों ने 1990-1995 के बीच हुई अवैध निकासी और वित्तीय अनियमितताओं पर गवाही दी।
झारखंड हाईकोर्ट में देवघर कोषागार चारा घोटाले के मामले में पूर्व बिहार मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव द्वारा दायर की गई अपील पर सुनवाई जारी है। अदालत ने इस मामले में 1990 के दशक की शुरुआत में हुए वित्तीय अनियमितताओं और प्रशासनिक लापरवाही के आरोपों पर विचार किया।
सुनवाई के दौरान पूर्व जिला उपायुक्तों की गवाहियां पेश की गईं। इन अधिकारियों ने 1990 से 1995 के बीच हुए प्रशासनिक प्रक्रियाओं और वित्तीय लेन-देन के बारे में जानकारी दी। गवाहियों में कोषागार से अवैध निकासी की प्रक्रिया और उस समय की प्रशासनिक स्थिति से जुड़े तथ्य सामने आए।
इस घोटाले का मुख्य मुद्दा चारा धन का गलत तरीके से उपयोग और प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका है। अदालत ने उस समय के दस्तावेजों और गवाहों के बयानों की जांच की, जिनमें मानक सरकारी प्रक्रियाओं का पालन न किए जाने के संकेत मिले। हाईकोर्ट इन तथ्यों के आधार पर निचली अदालत के फैसले के खिलाफ अपील पर अपना निर्णय लेने जा रही है।
यह मामला झारखंड के सार्वजनिक क्षेत्र में वित्तीय अनियमितताओं की कानूनी जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। अदालत अब पेश किए गए सबूतों और गवाहियों का मूल्यांकन करके इस मामले में अंतिम निर्णय देने की प्रक्रिया में है।
सुनवाई के दौरान पूर्व जिला उपायुक्तों की गवाहियां पेश की गईं। इन अधिकारियों ने 1990 से 1995 के बीच हुए प्रशासनिक प्रक्रियाओं और वित्तीय लेन-देन के बारे में जानकारी दी। गवाहियों में कोषागार से अवैध निकासी की प्रक्रिया और उस समय की प्रशासनिक स्थिति से जुड़े तथ्य सामने आए।
इस घोटाले का मुख्य मुद्दा चारा धन का गलत तरीके से उपयोग और प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका है। अदालत ने उस समय के दस्तावेजों और गवाहों के बयानों की जांच की, जिनमें मानक सरकारी प्रक्रियाओं का पालन न किए जाने के संकेत मिले। हाईकोर्ट इन तथ्यों के आधार पर निचली अदालत के फैसले के खिलाफ अपील पर अपना निर्णय लेने जा रही है।
यह मामला झारखंड के सार्वजनिक क्षेत्र में वित्तीय अनियमितताओं की कानूनी जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। अदालत अब पेश किए गए सबूतों और गवाहियों का मूल्यांकन करके इस मामले में अंतिम निर्णय देने की प्रक्रिया में है।