📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / U.S. Commission of Fine Arts
राजनीति
भारत ने यूएससीआईआरएफ पर राजनीतिक पक्षपात का आरोप, धार्मिक स्वतंत्रता की निगरानी में सवाल
✍️ The Times of India
🗓 07 नव. 2026, 11:39 PM
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नई दिल्ली ने यूएससीआईआरएफ पर राजनीतिक एजेंडा का आरोप लगाते हुए, धार्मिक अधिकारों की निष्पक्ष निगरानी पर सवाल उठाए हैं।
भारत सरकार ने यूएससीआईआरएफ (U.S. Commission on International Religious Freedom) पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है। नई दिल्ली के अधिकारियों का कहना है कि इस एजेंसी की धार्मिक स्वतंत्रता संबंधी रिपोर्टें विदेश नीति के एजेंडा को आगे बढ़ाने के लिए उपयोग की जा रही हैं, न कि निष्पक्ष निगरानी के लिए।
यूएससीआईआरएफ एक स्वतंत्र अमेरिकी सरकारी निकाय है, जिसका काम विश्वभर में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति पर नजर रखना और राज्य विभाग को सलाह देना है। भारत ने उन हालिया रिपोर्टों को चुनौती दी है, जिनमें देश में धार्मिक प्रथाओं के बारे में चिंताएँ उठाई गई थीं, और कहा है कि इन्हें राजनीतिक उद्देश्यों के लिए बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया गया है।
द टाइम्स ऑफ इंडिया ने इस विवाद की रिपोर्ट की, यह बताया कि भारत इस मुद्दे को कूटनीतिक माध्यमों से उठाने की योजना बना रहा है। अभी तक दोनों पक्षों से विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं मिली है, और यह मुद्दा आगामी द्विपक्षीय वार्तालापों में चर्चा का विषय बन सकता है।
यह विवाद अंतर्राष्ट्रीय निगरानी निकायों और संप्रभु राष्ट्रों के बीच धार्मिक‑अधिकार डेटा की व्याख्या को लेकर चल रहे तनाव को उजागर करता है, और यह दर्शाता है कि बाहरी एजेंसियों की भूमिका पर बहस जारी है।
यूएससीआईआरएफ एक स्वतंत्र अमेरिकी सरकारी निकाय है, जिसका काम विश्वभर में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति पर नजर रखना और राज्य विभाग को सलाह देना है। भारत ने उन हालिया रिपोर्टों को चुनौती दी है, जिनमें देश में धार्मिक प्रथाओं के बारे में चिंताएँ उठाई गई थीं, और कहा है कि इन्हें राजनीतिक उद्देश्यों के लिए बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया गया है।
द टाइम्स ऑफ इंडिया ने इस विवाद की रिपोर्ट की, यह बताया कि भारत इस मुद्दे को कूटनीतिक माध्यमों से उठाने की योजना बना रहा है। अभी तक दोनों पक्षों से विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं मिली है, और यह मुद्दा आगामी द्विपक्षीय वार्तालापों में चर्चा का विषय बन सकता है।
यह विवाद अंतर्राष्ट्रीय निगरानी निकायों और संप्रभु राष्ट्रों के बीच धार्मिक‑अधिकार डेटा की व्याख्या को लेकर चल रहे तनाव को उजागर करता है, और यह दर्शाता है कि बाहरी एजेंसियों की भूमिका पर बहस जारी है।