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08 नव. 2026•
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गया में छठ व्रत से बदलती है परिवार की दिनचर्या, शुद्धता पर रहता है जोर
📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Goutam1962
धर्म

गया में छठ व्रत से बदलती है परिवार की दिनचर्या, शुद्धता पर रहता है जोर

✍️ Amar Ujala · Gaya 🗓 06 नव. 2026, 10:37 PM 👁 4
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गया में छठ व्रत के दौरान परिवार अपनी दिनचर्या बदलते हैं, सुबह के अनुष्ठान और शुद्धता को प्राथमिकता देते हैं।

छठ व्रत, सूर्य देवता को समर्पित चार दिवसीय सूर्य पर्व, बिहार के गया में बड़े श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। व्रत की शुरुआत सूर्योदय से पहले होती है, जब भक्त नदी किनारे एकत्रित होकर प्रातःकालिक अर्घ्य अर्पित करते हैं।
इस अवधि में परिवार अपनी दिनचर्या में बदलाव लाते हैं: सभी सदस्य सुबह जल्दी उठते हैं, मांस व शराब से परहेज करते हैं और घर को अत्यधिक स्वच्छ रखते हैं। विशेष मिठाई ‘थेहूआ’ और उबले चावल जैसी भोग सामग्री को शुद्ध सामग्री से तैयार किया जाता है।
शुद्धता पर विशेष ध्यान दिया जाता है; न केवल भोजन में बल्कि व्यक्तिगत स्वच्छता और आसपास के वातावरण में भी। घर‑घर में धूल से बचाव, नियमित स्नान और साफ‑सफाई को अनिवार्य माना जाता है, जो इस पर्व के शारीरिक‑आत्मिक शुद्धिकरण के सिद्धांत को दर्शाता है।
इन बदलावों के कारण काम‑काज, स्कूल‑क्लास और स्थानीय व्यापार भी कुछ दिनों के लिए समायोजित होते हैं, ताकि भक्तों के प्रातःकालिक अनुष्ठानों में बाधा न आए।
समग्र रूप से, गया में छठ व्रत दर्शाता है कि एक धार्मिक उत्सव कैसे परिवार की दैनिक जीवनशैली को अस्थायी रूप से बदल सकता है, सामाजिक बंधन को सुदृढ़ करता है और शुद्धता के सिद्धांत को उजागर करता है।
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