📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ministry of Defence
शिक्षा
आईआईटी गोवा प्रोफ़ेसर की एआई‑रोधी परीक्षा पद्धति ने मचाई धूम
✍️ NDTV Profit
🗓 07 नव. 2026, 01:40 AM
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आईआईटी गोवा के एक प्रोफ़ेसर ने एआई टूल्स को मात देने वाली नई परीक्षा पद्धति पेश की, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई।
आईआईटी गोवा के एक प्रोफ़ेसर ने ऐसी परीक्षा पद्धति पेश की है जो छात्रों को एआई टूल्स का उपयोग करने से रोकती है। इस पद्धति में छात्रों को वास्तविक समय में समस्याओं का समाधान करना पड़ता है, जिससे मूल समझ की परीक्षा होती है।
प्रोफ़ेसर ने इस पद्धति के विवरण सोशल मीडिया पर साझा किए, जिसमें उन्होंने बताया कि यह केवल एआई प्रॉम्प्टिंग की बजाय बुनियादी ज्ञान की जांच करता है। पोस्ट को कुछ घंटों में ही हजारों लाइक, टिप्पणी और शेयर मिले, और कई लोगों ने इसे एआई‑आधारित शॉर्टकट्स को रोकने के कदम के रूप में सराहा।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि एआई टूल्स सीखने में मदद कर सकते हैं, पर मूल्यांकन को इस तरह बदलना आवश्यक है कि वास्तविक समझ का परीक्षण हो। आईआईटी गोवा की इस पहल को अब कई संस्थानों ने नज़र में रखा है और वे समान एआई‑रोधी मॉडल अपनाने पर विचार कर रहे हैं।
यह वायरल घटना एआई के शैक्षणिक उपयोग पर बढ़ती चिंता को दर्शाती है और डिजिटल युग में शैक्षणिक ईमानदारी बनाए रखने के व्यापक बहस को उजागर करती है।
प्रोफ़ेसर ने इस पद्धति के विवरण सोशल मीडिया पर साझा किए, जिसमें उन्होंने बताया कि यह केवल एआई प्रॉम्प्टिंग की बजाय बुनियादी ज्ञान की जांच करता है। पोस्ट को कुछ घंटों में ही हजारों लाइक, टिप्पणी और शेयर मिले, और कई लोगों ने इसे एआई‑आधारित शॉर्टकट्स को रोकने के कदम के रूप में सराहा।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि एआई टूल्स सीखने में मदद कर सकते हैं, पर मूल्यांकन को इस तरह बदलना आवश्यक है कि वास्तविक समझ का परीक्षण हो। आईआईटी गोवा की इस पहल को अब कई संस्थानों ने नज़र में रखा है और वे समान एआई‑रोधी मॉडल अपनाने पर विचार कर रहे हैं।
यह वायरल घटना एआई के शैक्षणिक उपयोग पर बढ़ती चिंता को दर्शाती है और डिजिटल युग में शैक्षणिक ईमानदारी बनाए रखने के व्यापक बहस को उजागर करती है।