📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ministry of Culture
राजनीति
कांग्रेस ने लखनऊ के रामलीला मैदान में ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली आयोजित, विपक्षी मोर्चे पर वापसी का इशारा
✍️ Amar Ujala · Delhi
🗓 02 नव. 2026, 09:37 AM
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रविवार को लखनऊ के रामलीला मैदान में कांग्रेस ने ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली आयोजित की, जिससे विपक्षी मोर्चे पर अपनी वापसी का संदेश दिया।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने रविवार को लखनऊ के रामलीला मैदान में ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ शीर्षक से एक बड़ी जनसभा आयोजित की। यह रैली आगामी चुनावी परिदृश्य में विपक्षी राजनीति के केंद्र में अपनी स्थिति को पुनः स्थापित करने के उद्देश्य से आयोजित की गई।
पार्टी के वरिष्ठ नेता उपस्थित भीड़ को संबोधित करते हुए सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते रहे और वोटरों से वर्तमान शासन को अस्वीकार करने का आह्वान किया। कार्यक्रम में भाषण, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और विरोधी ताकतों के बीच एकता का संदेश शामिल था।
विशेष रूप से, समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता अखिलेश यादव ने बिना किसी औपचारिक गठबंधन के इस मंच पर भाग लिया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि यह राजनीतिक मजबूरी के कारण था, न कि सहयोगी समझौते के तहत। वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी इस रैली में उपस्थित नहीं थे, जो आंतरिक समय‑सारिणी की बाध्यता को दर्शाता है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह रैली कांग्रेस की मुख्य विपक्षी आवाज़ के रूप में अपनी भूमिका को पुनः प्राप्त करने की कोशिश को दर्शाती है, विशेषकर ऐसे राज्य में जहाँ क्षेत्रीय पार्टियों का प्रभाव अधिक रहा है। इस कार्यक्रम के अंत में आगामी राज्य और राष्ट्रीय चुनावों के लिए जमीनी स्तर पर समर्थन जुटाने का संकल्प लिया गया।
पार्टी के वरिष्ठ नेता उपस्थित भीड़ को संबोधित करते हुए सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते रहे और वोटरों से वर्तमान शासन को अस्वीकार करने का आह्वान किया। कार्यक्रम में भाषण, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और विरोधी ताकतों के बीच एकता का संदेश शामिल था।
विशेष रूप से, समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता अखिलेश यादव ने बिना किसी औपचारिक गठबंधन के इस मंच पर भाग लिया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि यह राजनीतिक मजबूरी के कारण था, न कि सहयोगी समझौते के तहत। वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी इस रैली में उपस्थित नहीं थे, जो आंतरिक समय‑सारिणी की बाध्यता को दर्शाता है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह रैली कांग्रेस की मुख्य विपक्षी आवाज़ के रूप में अपनी भूमिका को पुनः प्राप्त करने की कोशिश को दर्शाती है, विशेषकर ऐसे राज्य में जहाँ क्षेत्रीय पार्टियों का प्रभाव अधिक रहा है। इस कार्यक्रम के अंत में आगामी राज्य और राष्ट्रीय चुनावों के लिए जमीनी स्तर पर समर्थन जुटाने का संकल्प लिया गया।