📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ajay roy
धर्म
छोटी दिवाली 2026: यम दीपदान, भद्रा का समय और पूजा विधि
✍️ Aaj Tak
🗓 07 नव. 2026, 01:00 PM
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7 नवंबर 2026 को छोटी दिवाली मनाई जाएगी। इस दिन यम दीपदान और भद्रा काल का पालन करके पूजा करने से शुभ फल मिलते हैं।
छोटी दिवाली, जिसे कच्चा चतुर्दशी भी कहा जाता है, 7 नवंबर 2026 को मनाई जाएगी। हिंदू पंचांग में इस दिन का विशेष महत्व है, क्योंकि यह मुख्य दिवाली पर्व के एक दिन पहले आता है। इस दिन भगवान यमराज की कृपा पाने के लिए विशेष पूजा-पाठ किया जाता है।
इस दिन का सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान यम दीपदान है, जिसमें भगवान यम के नाम से दीपक जलाया जाता है। मान्यता है कि इस अनुष्ठान से अकाल मृत्यु से बचाव होता है और परिवार के सदस्यों को दीर्घायु और स्वास्थ्य प्राप्त होता है। इस अनुष्ठान का शुभ मुहूर्त बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है।
छोटी दिवाली पर भद्रा काल का भी विशेष महत्व है। यह 12 घंटे का समय होता है, जिसके दौरान नई शुरुआत या वित्तीय लेन-देन जैसे कार्यों से बचना चाहिए। इस काल का पालन करने से आने वाली दिवाली उत्सवों की शुभता बनाए रखी जा सकती है।
भक्तों को इस दिन अभ्यंग स्नान, यानी तेल से मालिश करके स्नान करने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि यह अनुष्ठान शरीर और मन को शुद्ध करता है और मुख्य दिवाली उत्सवों के लिए तैयार करता है। इन अनुष्ठानों के लिए सटीक समय के लिए स्थानीय पंचांग का संदर्भ लेना उचित होगा।
इस दिन का सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान यम दीपदान है, जिसमें भगवान यम के नाम से दीपक जलाया जाता है। मान्यता है कि इस अनुष्ठान से अकाल मृत्यु से बचाव होता है और परिवार के सदस्यों को दीर्घायु और स्वास्थ्य प्राप्त होता है। इस अनुष्ठान का शुभ मुहूर्त बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है।
छोटी दिवाली पर भद्रा काल का भी विशेष महत्व है। यह 12 घंटे का समय होता है, जिसके दौरान नई शुरुआत या वित्तीय लेन-देन जैसे कार्यों से बचना चाहिए। इस काल का पालन करने से आने वाली दिवाली उत्सवों की शुभता बनाए रखी जा सकती है।
भक्तों को इस दिन अभ्यंग स्नान, यानी तेल से मालिश करके स्नान करने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि यह अनुष्ठान शरीर और मन को शुद्ध करता है और मुख्य दिवाली उत्सवों के लिए तैयार करता है। इन अनुष्ठानों के लिए सटीक समय के लिए स्थानीय पंचांग का संदर्भ लेना उचित होगा।