📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / swap
राजनीति
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने हसदी बांगो नहर के लिए अधिग्रहीत जमीन वापस करने की मांग खारिज कर दी
✍️ The Times of India
🗓 08 नव. 2026, 07:37 AM
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छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने हसदी बांगो नहर परियोजना के लिए अधिग्रहीत लेकिन उपयोग न की गई जमीन को वापस करने के आदेश देने से इनकार कर दिया है।
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने हसदी बांगो नहर परियोजना के लिए अधिग्रहीत, लेकिन अभी तक उपयोग न की गई जमीन को वापस करने की याचिका खारिज कर दी है। न्यायालय ने इस जमीन को मूल मालिकों को लौटाने के आदेश जारी करने से इनकार कर दिया है।
न्यायालय ने इस निर्णय के माध्यम से सार्वजनिक परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को बनाए रखा है। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि चूंकि जमीन का तत्काल उपयोग नहीं किया गया है, इसलिए उसे वापस किया जाना चाहिए।
यह फैसला सार्वजनिक हित के लिए अधिग्रहीत जमीन के रखरखाव के कानूनी पहलू को दर्शाता है, भले ही निर्माण या उपयोग का चरण अभी पूरा न हुआ हो। इस निर्णय से नहर परियोजना के लिए निर्धारित जमीन का अधिग्रहण स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है।
हसदी बांगो नहर राज्य के कृषि और जल संसाधन योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। न्यायालय द्वारा जमीन वापस करने के आदेश से इनकार करने से इस परियोजना के कानूनी ढांचे में निरंतरता सुनिश्चित होती है।
न्यायालय ने इस निर्णय के माध्यम से सार्वजनिक परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को बनाए रखा है। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि चूंकि जमीन का तत्काल उपयोग नहीं किया गया है, इसलिए उसे वापस किया जाना चाहिए।
यह फैसला सार्वजनिक हित के लिए अधिग्रहीत जमीन के रखरखाव के कानूनी पहलू को दर्शाता है, भले ही निर्माण या उपयोग का चरण अभी पूरा न हुआ हो। इस निर्णय से नहर परियोजना के लिए निर्धारित जमीन का अधिग्रहण स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है।
हसदी बांगो नहर राज्य के कृषि और जल संसाधन योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। न्यायालय द्वारा जमीन वापस करने के आदेश से इनकार करने से इस परियोजना के कानूनी ढांचे में निरंतरता सुनिश्चित होती है।