📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Al Jazeera
राजनीति
हरदा में 2 नवंबर को भाजपा का 'लोकतंत्र बचाओ' पैदल मार्च, विपक्ष के आरोपों पर प्रतिक्रिया
✍️ Amar Ujala · Madhya Pradesh
🗓 02 नव. 2026, 12:36 PM
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मध्य प्रदेश के हरदा में 2 नवंबर को भाजपा 10 हजार लोगों के साथ पैदल मार्च निकालेगी। यह अभियान विपक्ष की ओर से EVM और मतदाता सूची को लेकर किए गए आरोपों के जवाब में 'लोकतंत्र बचाओ' नारे के साथ आयोजित किया जा रहा है।
मध्य प्रदेश के हरदा में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) 2 नवंबर को एक बड़े पैदावम प्रदर्शन की तैयारी में है। पार्टी 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' नारे के तहत लगभग 10 हजार लोगों के साथ एक पैदल मार्च निकालने जा रही है।
यह कदम राजनीतिक तनाव के बीच उठाया गया है, जहां विपक्षी दलों ने चुनावी प्रक्रिया, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) की विश्वसनीयता और मतदाता सूची की सटीकता को लेकर आरोप लगाए हैं। भाजपा ने इस मार्च को लोकतांत्रिक संस्थाओं को नुकसान पहुंचाने और अराजकता फैलाने के प्रयासों के खिलाफ एक आवश्यक प्रतिक्रिया के रूप में पेश किया है।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य पार्टी की स्थानीय स्तर पर शक्ति प्रदर्शन करना है। पार्टी नेताओं ने इस मार्च के माध्यम से लोकतांत्रिक ढांचे में जनता का विश्वास पुनः स्थापित करने और विपक्ष द्वारा उठाए गए चुनावी प्रक्रिया की अखंडता से जुड़े मुद्दों का जवाब देने की बात कही है।
विपक्ष द्वारा प्रक्रियागत मुद्दों पर जोर देने के बावजूद, भाजपा का दावा है कि यह पहल लोकतंत्र को बेबुनियाद आरोपों और राजनीतिक अफरा-तफरी से बचाने के लिए एक शांत लेकिन दृढ़ कदम है।
यह कदम राजनीतिक तनाव के बीच उठाया गया है, जहां विपक्षी दलों ने चुनावी प्रक्रिया, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) की विश्वसनीयता और मतदाता सूची की सटीकता को लेकर आरोप लगाए हैं। भाजपा ने इस मार्च को लोकतांत्रिक संस्थाओं को नुकसान पहुंचाने और अराजकता फैलाने के प्रयासों के खिलाफ एक आवश्यक प्रतिक्रिया के रूप में पेश किया है।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य पार्टी की स्थानीय स्तर पर शक्ति प्रदर्शन करना है। पार्टी नेताओं ने इस मार्च के माध्यम से लोकतांत्रिक ढांचे में जनता का विश्वास पुनः स्थापित करने और विपक्ष द्वारा उठाए गए चुनावी प्रक्रिया की अखंडता से जुड़े मुद्दों का जवाब देने की बात कही है।
विपक्ष द्वारा प्रक्रियागत मुद्दों पर जोर देने के बावजूद, भाजपा का दावा है कि यह पहल लोकतंत्र को बेबुनियाद आरोपों और राजनीतिक अफरा-तफरी से बचाने के लिए एक शांत लेकिन दृढ़ कदम है।