📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Suyash Dwivedi
अपराध
भोपाल लोकायुक्त ने पूर्व टीएनसीपी संयुक्त संचालक सुनीता सिंह पर संपत्ति मामला दर्ज
✍️ Amar Ujala · Madhya Pradesh
🗓 03 नव. 2026, 07:36 PM
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भोपाल लोकायुक्त ने पूर्व टीएनसीपी संयुक्त संचालक सुनीता सिंह पर संपत्ति मामला दर्ज किया है, जिसमें दावा है कि उनकी संपत्ति उनकी आय से 250% अधिक है।
भोपाल लोकायुक्त ने सुनीता सिंह, पूर्व टीएनसीपी संयुक्त संचालक, के खिलाफ एक औपचारिक केस दर्ज किया है। इस शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सिंह के पास उनकी घोषित आय से 250 प्रतिशत अधिक संपत्ति है।
लोकायुक्त के बयान के अनुसार, यह असंगति संपत्ति, निवेश और अन्य वित्तीय परिसंपत्तियों से जुड़ी है, जिन्हें सिंह ने अपनी आधिकारिक वित्तीय विवरणों में प्रकट नहीं किया है। यह शिकायत इन परिसंपत्तियों के स्रोत की जाँच और किसी भी अवैध संपन्नता की पुष्टि के लिए एक विस्तृत जांच का आह्वान करती है।
सुनीता सिंह ने कई वर्षों तक टीएनसीपी में संयुक्त संचालक के पद पर कार्य किया, जहाँ उन्होंने जनजातीय समुदायों के लिए प्रशासनिक और विकासात्मक कार्यों की निगरानी की। सिंह का कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड नहीं पाया गया है, और उन्होंने अभी तक आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
लोकायुक्त ने एक प्रारंभिक जांच का आदेश दिया है और सिंह से 15 दिनों के भीतर एक विस्तृत संपत्ति घोषणा प्रस्तुत करने का अनुरोध किया है। यदि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है, तो भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम के तहत आगे कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
लोकायुक्त के बयान के अनुसार, यह असंगति संपत्ति, निवेश और अन्य वित्तीय परिसंपत्तियों से जुड़ी है, जिन्हें सिंह ने अपनी आधिकारिक वित्तीय विवरणों में प्रकट नहीं किया है। यह शिकायत इन परिसंपत्तियों के स्रोत की जाँच और किसी भी अवैध संपन्नता की पुष्टि के लिए एक विस्तृत जांच का आह्वान करती है।
सुनीता सिंह ने कई वर्षों तक टीएनसीपी में संयुक्त संचालक के पद पर कार्य किया, जहाँ उन्होंने जनजातीय समुदायों के लिए प्रशासनिक और विकासात्मक कार्यों की निगरानी की। सिंह का कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड नहीं पाया गया है, और उन्होंने अभी तक आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
लोकायुक्त ने एक प्रारंभिक जांच का आदेश दिया है और सिंह से 15 दिनों के भीतर एक विस्तृत संपत्ति घोषणा प्रस्तुत करने का अनुरोध किया है। यदि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है, तो भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम के तहत आगे कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।